मजूर सहायता – लेबरलाइन*

Labour Line Stickerकेलवाडा -उदयपुर के बीच में चलने वाली बस में जब में बरवाडा से चढ़ा तो बैठते ही मेरी नजर सामने लगे लेबरलाइन के स्टिकर पर पड़ी जिस पर लिखा था लेबरलाइन 0294 2451124 मुसीबत में फंसे मजदूरों के लिए फोन सेवा। उसको देखते ही उसके बारे में लोगों की जानकरी के बारे में मेरे दिमाग में कुलबुली हुई। सोचा इसके बारे में लोगों की जानकारी देखते हैं। शुरूआत मेरे बगल में बैठे गहरी लाल गमेती से की। जैसे ही मैंने पहला सवाल पूंछा कि से सामने किसका नम्बर लिखा है तो गहरी लाल ने कहा मजूर सहायता, और फिर शुरू हुआ मजूर सहायता (लेबरलाइन) का गुणगान।

“साब यो मजूरों री सहाय रे बाते है, मजूर किणी तरह री मुसीपत में होये तो इना नम्बर पर फोन करो। हर तरह री मुसीपत में मदद मिलेगी”। (यह मजदूरों की सहायता के लिए है, मजदूर किसी भी प्रकार की मुसीबत हो तो इस नम्बर पर फोन करो। हर प्रकार की मुसीबत में मदद मिलेगी)। जब मैने पूंछा कि कैसी मुसीबत तो गहरी लाल ने बताया कि मजदूरी नहीं मिले, मारपीट हो जाए, काम पर चोट लग जाए और तो और ये मदद के बदले आफिस वाले कोई पैसा भी नहीं लेते हैं, एकदम फ्री सेवा है। इतने में ही बगल वाली सीट पर बैठा एक नौजवान बोला इस नम्बर पर फोन करने से मजदूरों को काम दिलाने में भी ये मदद करते हैं। हमारी पिछली सीट पर बैठे भगवती लाल जो कि बरवाडा (जिला-उदयपुर) में दुकान करते हैं बोले कि इनका आफिस बरवाड़ा में है। आजीविका ब्यूरो नाम की एक संस्था है और उदयपुर में साइफन चैराहे पर हैड आफिस है। गहरी लाल जो कि कठार (जिला-उदयपुर) के रहने वाले हैं और आसपास के क्षेत्र में चिनाई कारीगर का कार्य करते हैं ने बताया कि केलवाडा (जिला-राजसमंद) में भी एक आफिस है। लेबरलाइन के बारे में इन सभी की जानकारी वास्तव में मेरी अपेक्षा व सोच से अधिक थी।

बस में मेरे इर्द-गिर्द पांच-छः लोग इकट्ठे हो गए और लेबरलाइन पर जोरदार चर्चा चल रही थी। मैं अनभिज्ञ IMG_5856बना सुन रहा था और सभी मुझे लेबरलाइन के बारे में बताए जा रहे थे। मैं मन ही मन फूला नहीं समा रहा था परन्तु लोगों के रोचक अनुभवों को सुनने की ललक में ये नहीं बता पा रहा था कि मैं भी आजीविका ब्यूरो में ही काम करता हूं। मुझे लगा कि जैसे ही मैंने बताया कि में भी आजीविका ब्यूरो में काम करता हूं तो इनकी बातों में पक्षपात आ जाएगा। खैर चर्चा चलती रही और भगवती लाल ने बताया कि ये आफिस वालों ने मजदूरों के लाखों रूपये दिलाने में मदद की है जो कि वर्षों से मजदूरी करने के बाद फंसे हुए थे। उनके द्वारा हर बात के अन्त में कहा जाने वाला शब्द ये आफिस मजदूरों के लिए बहुत अच्छा काम करता है दिल को खुश कर जाता। मेरी खुशी का ठिकाना तो जब नहीं रहा जब गहरी लाल और नोजा राम ने अपना मोबाइल निकाल कर हिन्दी में मजूर सहायता के नाम से अपनी फोन बुक में लेबरलाइन का सेव किया हुए नम्बर दिखाया। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने बता ही दिया कि मैं भी इसी आफिस में काम करता हूं, फिर क्या था वहां सभी लोग मुझे अचम्भे से देख रहे थे। भगवती लाल ने पूंछा कि फिर आप ये सब क्यों पूंछ रहे थे ? मेरा जबाव था कि श्रमिकों को बेहतर सेवा और जानकारी देना आजीविका ब्यूरो का प्रमुख ध्येय है ओर इसके लिए इन सेवाओं के उपयोगकर्ताओं के सुझाव व फीडबैक ही उसका बेहतर तरीका होता है।

कुछ दिन पहले जब मैं अमृता जी से श्रमिक मित्रों की भूमिका और हमारी अपेक्षा की बात करते हुए यह बता रहा था कि ये आजीविका ब्यूरो के दूत के रूप में फील्ड़ में मौजूद रहते हैं। और हमारी अनुपस्थिति में भी outreach- canopy abhiyanप्रवासी श्रमिकों को जानकारी देते हैं। कहते हुए मुझे एकबारगी लगा कि मैं कहीं बहुत आदर्शवादी बातें तो नहीं कर रहा हूं। क्योंकि कई स्वयंसेवी व श्रमिक मित्रों के साथ मेरे अनुभव बहुत अच्छे नहीं रहे थे। परन्तु अब मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि अगर श्रमिक मित्रों व स्वयंसेवीयों को अच्छी तरह से समझाया जाए तो ये सच्चे प्रचारक व आजीविका के दूत हैं। समुदाय में काम की छाप और इन्हीं के द्वारा प्रचार के लिए इन पर समय व जानकारी का निवेश करने की आवश्यकता है। परिणाम सकारात्मक और फल अवश्य ही मीठा होगा।

– Santosh Poonia, Aajeevika Bureau

*आजीविका ब्यूरो ने अगस्त 2011 में लेबरलाइन की शुरूआत की थी। अब इसका एक टोल फ्री नम्बर भी है जो 1800 1800 999 है। इस नम्बर पर श्रमिक कहीं से भी अपनी समस्या व परेशानी दर्ज करवा सकता है। लेबरलाइन की शीर्षक “लाइन डरो मत फोन करो” है।

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2 Responses to मजूर सहायता – लेबरलाइन*

  1. Divya Varma says:

    Dear Santoshji,

    This was a great write-up. I really enjoyed reading about it, felt very happy and proud. Thank you for putting this up.

    Divya

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