उजाले समूह के …

‘‘रोजगार गारंटी का काम तो कुछ सालों से करते ही आ रहे है लेकिन इस बार काम करने में कुछ ज्यादा मजा आया।‘‘ टेकला गांव की शान्तु बाई और लालकी बाई जब बात करती है तो उनके चेहरे पर कुछ कर सकने का संतोष झलक आता है।

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डूंगरपुर जिले में टेकला जैसे सैकडों गांव है जिनसे आदमी काम कमाई के मकसद से साल का ज्यादातर समय अहमदाबाद, इन्दौर या मूम्बई में बिताते है। घरों में कुछ बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे रहते हैं। इन परिवारों के आय के साधन सीमित है। रोजगार गारंटी से थोडी मदद मिलती है बषर्ते कि उसके तहत काम बराबर मिलता रहे । इलाके के कई परिवारों की तरह ये परिवार भी काम की जरुरत पर काम नहीं मांगते । वे मानते है कि सरकार का जब मन होगा तो काम आ जायेगा। काम मांगने के बारे में सोच पाना उनके मुश्किल है।

स्थितियों में थोडा बदलाव आया जब ऐसे परिवारों की महिलाआं के समूह बने- उजाला समूह। श्रमिक केन्द्र के मार्गदर्षन से जब महिलाएं एक साथ आई तो थोडा समझ आया कि रोजगार गारंटी काम की गारंटी देता है न केवल काम की उम्मीद।

पहली बार जब टेकला की महिलाएं इकठ्ठा होकर काम का आवेदन करने पंचायत पर गई तो मन में शंका ही थी। उससे पहले कितने पापड बेलने पडे थे उन्हें। उनके जाब कार्ड भी तो मेट के घर पर ही रखे रहते थे। उन्हें निकलवाने में भी बहुत मेहनत लगी।

खैर, महिलाएं जब पंचायत के दरवाजे पर पंहुची तो सरपंच और सचिव के लिए समझना मुश्किल हो गया । उनके दिमाग घूम कर रह गये जब उन्हें पता चला कि ये सब रोजगार गारंटी के तहत काम मांगने आई है। बौखलाये सरपंच साब थोडा नाराज हुए और लगे महिलाओं को खरी-खोटी सुनाने। उनका कहना था कि

इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ जब कोई काम मांगने के लिए पंचायत तक चलकर आ गया हो। पहले तो उन्हें लगा महिलाओं को थोडा डांट-डपट देने से ये सब उल्टे पांव लौट जायेगी । उन्होंने यह नुस्खा अपनाया किन्तु महिलाएं भी ठान कर आई थी। वे अड गई। सरपंच साब ने महिलाओं को शर्म करने की दुहाई तक दे डाली । लेकिन महिलाएं टस से मस नहीं हुई।

सरपंच साहब भांप गए कि महिलाएं नहीं मानने वाली है। थोडे ठण्डे हुए और सचिव को इषारा किया । सचिव साहब आवेदन पत्रों के साथ महिलाओं के बीच पंहुच गये। धडा-धड आवेदन भरे गये। महिलाओं को आश्वासन देकर घर जाने को कहा गया। महिलाएं बोली – बिना रसीद के नहीं जाऐंगी। सरपंच साहब ने एक ओर बार सचिव को देखा। सचिव ने रसीद भी महिलाओं को उपलब्ध करा दी। महिलाएं धन्यवाद देते हुए किसी विजेता की भांति लौट गई।

10 दिन बाद काम मिला। महिलाएं दुगूने उत्साह के साथ काम पर गई। मस्टरोल में अपना अपना नाम चैक किया और काम पर जुट गई।

– Sadhana Rajput, Aajeevika Bureau

(Sadhana ji has been with Aajeevika for more than 4 years now. Bright as the polestar, her chemistry with the womenfolk of the Samoohas (groups) she brings together is worth a watch and the energy she infuses in them, unparalleled. Talk to her anytime and she has an inspiring story to tell)

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3 Responses to उजाले समूह के …

  1. remarkable impact. it will insist me to do the same better in my cluster.
    Dilip sharma
    PFT Coordinator
    RRLP RAJSAMAND

  2. Santosh Poonia says:

    Dear Sadhna ji,

    Very well written piece. Definitely you fill the energy in womens group and also you have more stories like that. Keep it up and writing more.

    Regards,
    Santosh

  3. Janvi says:

    Dhanyavaad Sadhnaji! You inspire people from all walks of life – not just through your work but also with your words now. Kalam se logon ko apna sandesh pahunchate rahiye.

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