हर जीवन, जीवन जीने का इक समझौता है

केसा राम उम्र 29 वर्ष आंतरी ग्राम पंचायत के बारा ग्राम (खोखरियों का भीलवाडा़) के निवासी हैं। बात 2011 जून की है। अहमदाबाद में मारुति मैटल की फैक्ट्री में समय था शाम के 5.30 बजे।

केसा राम का काम इस फैक्ट्री में बर्तनों को आकार (साँचा) देने वाली मषीन को चलाना था। एक केतली का ढक्कन साँचे में तैयार हो रहा था तभी मषीन के अचानक गिरने से केसाराम के दोनों हाथ उसकी धार की

Kamal blog 1चपेट में आ गये। केसाराम को किरीट हाॅस्पीटल में ले जाया गया। लेकिन खर्च अधिक होने के कारण फैक्ट्री मालिक ने उसे वाडीलाल हाॅस्पीटल में भर्ती करा दिया।

केसाराम ने 10 वर्ष तक इस फैक्ट्री में नौकरी की थी। तब उन्हें 50 रुपये प्रति दिन के हिसाब से मिलता था, जो इस दौरान बढ़कर 300रु. प्रति दिन हो गया था।

लेकिन आज केसाराम की तरक्की के दो भरोसेमंद साथी उसके हाथ चपेट में आ गये थे।

उसका एक हाथ काटना पड़ा तथा दूसरे हाथ में पेट का मांस लगाकर कुछ हद तक काटने से रोका गया। फैक्ट्री मालिक ने केवल हाॅस्पीटल का खर्च देकर केसाराम को विदा करा दिया। इन्होंने मालिक से मिलकर गुजारे के लिए रुपये मांगे, लेकिन 10 साल की नौकरी की कीमत मिली महज 100 रुपये।

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केसाराम के परिवार में एक बूढ़े पिता, पत्नी तथा दो बच्चे हैं। इनकी कमाई पर ही पूरा परिवार चलता था। शारीरिक रुप से लाचार केसाराम इस मामले को लेकर लेबर कोर्ट का अनुभव केसाराम के लिए निराषाजनक रहा। केसाराम बताते हैं कि ‘‘4-5 बार उदयपुर में लेबर कोर्ट में इस के हाजिर होने के बावजूद फैक्ट्री मालिक कभी नहीं आये।‘‘2012 में आजीविका ब्यूरो की सायरा जनसुनवाई कार्यक्रम में आये। बाद में आजीविका ब्यूरो के श्रमिक सहायता एवं सन्दर्भ केन्द केलवाड़ा्र द्वारा इस मामले को लेबर कोर्ट ले जाया गया।

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आज केसाराम के पास उदयपुर लेबर कोर्ट जाने तक के लिए पैसे नहीं हैं। आज इनका पूरा परिवार आपको बारा में किसी पेड़ के नीचे महुआ बीनते मिल जाएगा। लेकिन शायद उस को 15-20 रुपये किलो के भाव से बेचकर भी केसाराम लेबर कोर्ट उदयपुर जाने का जोखिम मोल नहीं लेगा क्योंकि आर्थिक बदहाली के दौर से गुजर परिवार के लिए महुआ बेचकर चूल्हा जलाना ज्यादा जरुरी है।

Kamal Kishore Pandey, Shramik Sahayata Kendra, Kelwara

(Kamal is a dynamic young crusader working with Aajeevika’s Kelwara team since the last few months. A student of Hindi, he uses poetry with great panache blending it in his day today work. One couplet from a Dinkar poem that he introduced me to  – “नहीं पाप  का भागी केवल व्याध, जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध”…I have come to be awed by its depth and relevance to our work)

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