वक्त की मार से हारे मजदूर को श्रमिक केन्द्र का सहारा

विक्रमसिंह रामसिंह जाटव यमुना ब्रिज, आगरा का रहने वाला है। विक्रमसिंह की आयु 42 वर्ष है। कई सालोंon site 1 तक विक्रमसिंह ने आगरा के कारखानों में मिस्त्री का काम किया। मोहनलाल जो कि अहमदाबाद में ठेकेदारी करता है ने विक्रमसिंह को अहमदाबाद मे अच्छे पैसे देने का लालच दिया। यहां विक्रम सिंह अप्रेल महीने से रेडियन्स वेल्व प्रा. लि. नारोल अहमदाबाद में कारीगर का काम करने लगा। विक्रमसिंह के कुछ दिन अहमदाबाद मे अच्छे बीते, मालिक ने रहने के लिये कमरा दे रखा था और गांव के कुछ परिचित मजदूर भी इसी फैक्ट्री में ही काम करते थे।

हर रोज की तरह 24 अप्रेल के दिन भी विक्रमसिंह अपना काम कर रहा था। कार्य करते हुए उसका हाथ मशीन पर रखा था, ऊपर से क्रेन हाथ पर आकर गिरी। क्रेन गिरने से विक्रमसिंह के बाये हाथ के अंगूठे पर गंभीर चोट लगी, नजदीकी अस्पताल में इलाज करवाया गया। चोट गहरी होने के कारण अंगूठे पर टांके लगाए गए। प्रथम इलाज का खर्च तो नियोक्ता द्वारा उठाया गया परन्तु बाद में मालिक के द्वारा दवाई का कोई खर्च नहीं दिया गया। चोट लगने के बाद विक्रमसिंह को एक दिन का आराम भी नसीब नहीं हुआ।

चोट लगने के बावजूद भी वह काम करता रहा। एक दिन हाथ में दर्द अधिक होने से उसने अपने सुपरवाईजर से कहकर एक दिन की छुट्टी ली। थोडा आराम करके शाम को बाहर घूमने चला गया। जब वह रात को वापस आया तो देखा कि उसके कमरे के दरवाजे पर दूसरा ताला लगा हुआ था। विक्रमसिंह ने सुपरवाईजर से बात की तो सुपरवाईजर ने कहा की तुझे नौकरी से निकाल दिया गया है और अब तेरे लिए यहां पर कोई जगह नहीं है। विक्रमसिंह ने बड़ी मिन्नतें की कि एक रात रूकने के लिये जगह दे दो, परन्तु सुपरवाईजर ने एक न सुनी और उसका सामान उसको पकडा दिया गया। विक्रमसिंह ने वह रात सड़क पर ही गुजारी। अपने सामान को तकिया बनाकर वह रोड़ पर सो गया। जब सुबह नींद खुली तो पता चला कि सामान चोरी हो चुका है।

Labour Line Sticker

हताश, निराश विक्रम सिंह को तभी एक दुकान पर लगे स्टिकर से श्रमिक सहायता संदर्भ केन्द्र का फोन नंबर मिला। फोन कर उसने अपनी आप-बीती सुनाई और मदद के लिये कहा। केन्द्र पर उसका विवाद दर्ज किया गया। विेक्रमसिंह के विवाद के समाधान के लिये मालिक के पास जब गये तो मालिक ने बताया 10 दिन का पैसा तो मोहनलाल ठेकेदार ले गया है। मोहल लाल ठेकेदार से बात करने पर पता चला कि वह अभी मध्यप्रदेश में है और उसने कहा कि मैं तो विक्रम सिंह से और पैसे मांगता हूं अतः उसे कोई पैसा मत दिलवाओ। श्रमिक के अनुसार उसने कुछ पैसा खर्चे के लिए ठेकेदार से लिया है इसके अलावा उसको काई भुगतान नहीं किया गया है। बचे हुए दिनों की मजदूरी के लिए मालिक से बातचीत कर दूसरे दिन विक्रमसिंह को 3615 रू. का भुगतान करवाया गया। विक्रम सिंह ने केन्द्र का बहुत आभार व्यक्त किया कि अगर इस समय में श्रमिक केन्द्र मेरी मदद न करता तो मेरे लिए मजदूरी का पैसा लेना तो दूर गांव वापस जाने के लिए किराया तक नहीं भी नहीं मिल पाता।

– Rina Parmar, Aajeevika Bureau

(Rina has been with Aajeevika for two years, and she heads the destination operations of the organization at Ahmedabad. A fire-brand labor-enthusiast, that’s how we know her…dedicated to the cause of laborers and migration, she inspires many like me with her dynamism and verve…This case study has been documented by her as part of the legal aid  services offered by the organization.)

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3 Responses to वक्त की मार से हारे मजदूर को श्रमिक केन्द्र का सहारा

  1. Very touching story Reena ji

  2. Dilip Sharma says:

    truly

  3. Santosh Poonia says:

    success case of legal service, this is real impact of IEC material.
    Thanks for sharing Rina.

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