Monthly Archives: July 2015

मुम्बई छूट गई साब !!

इस बार की पहली बारिश ने मुझे पिछले साल की बारिश में मिले एक व्यक्ति की कहानी याद दिला दी। बरसात से बचने के लिए मुझे कालू के घर में शरण लेनी पडी। बरसात इतनी तेज थी कि वहां रुके … Continue reading

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“पढाई ना करके हमें मूर्ख थोड़ी रहना है”

“पढाई ना करके हमें मूर्ख थोड़ी रहना है” “माँ बाप्पा धरीना जाऊ चंदी, कष्ट करू चंती, हैमे आजीकाली रापिला कॉस्ट काहे करीबो. पाठा ना पढ़ीले मूर्खो हेबू.” (मेरे माता पिता मजदूरी करने जाते हैं, बहुत कठोर काम करते हैं, हम … Continue reading

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