हिम्मत से बड़ा कुछ नहीं

सांधना कुवंर राजपुत, Family Empowerment Programme

ना डर है ना झिझक है,
बस आगे बढने की ललक है।।

यह कहानी है मुंगेड गाँव, सबला तहसील में रहने वाली चम्पी बाई की, जिन्होंने अपने जीवन में आयी सभी चुनौतियों का डट कर सामना किया और असल में एक ‘चेम्पियन’ की तरह उभर कर आयीं. यह आजीविका ब्यूरो के द्वारा बने उजाला समुह सें पुर्व से ही जुडी हुई थी. चम्पी बाई ‘महिला सशक्तिकरण’ की एक असल मिसाल हैं! इन्होने न सिर्फ कानूनों की सही जानकारी प्राप्त की बल्की खुद ‘नरेगा मेट’ के रूप में प्रशासनिक ढाँचे को सुधारने की भी कोशिश की. अब यह अपने जैसी कईं महिलाओं के लिए एक उदाहरण की तरह खड़ी हैं.

चम्पी बाई के जीवन में चुनौतियां कम नहीं थी. पति की मृत्यु हो जाने के बाद घर के सभी सदस्यों  की जिम्मेदारी इनपर आ गई है; दो बच्चे (दोनो ही दिव्यांग है, बोल नही सकते, चल भी नहीं सकते), सास ससुर, और एक भतीजा. जब जिम्मेदारी आई तब घर में कमाने वाला कोई नही था। मुश्किलें बढ़ती गई। चम्पी बाई के पास खुद की पुंजी के रूप् में 8 वीं तक पढ़ाई और उजाला समूह का साथ था। । पंचायत में जाकर मेट के लिए आवेदन किया, मेट बनी और मेट बनने के बाद महिलाओ के साथ काम भी करवाया। पंचायत और गांव वालों की तरफ से आनी वाली रोक-टोक और चुनौतियों ने चम्पी बाई को मजबुत बनाया।

पति की मत्यु को ज्यादा समय नही हुआ था पर घर से बाहर निकलना एक मजबुरी थी. एक तरफ सामाजिक रिती-रिवाज के चलते कई प्रकार के बंधन से महिलाओ को जुझना पडता है। इन सभी समस्याओं से चम्पी बाई भी गुजरी। कोई सहारा नहीं बना और गॉव वालो ने कई प्रकार की बातें बनाई पर चम्पी बाई ने किसी की नही सुनी ।

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मेट का काम किया, मजदूरी की और एक बीमा कम्पनी के साथ जुड़कर आरडी (बचत) का काम किया। इन कामों से हुई आय से चम्पी बाई ने स्वयं की जमीन खरीद कर अपना घर बनाया, स्कुटी खरीदी, चलाना सीखा। चम्पी बाई बताती है कि, “पहले ऐसा कभी नही सोचा था, लेकिन अब मैं अपनी पंचायत में काम करती हूँ। गॉव की महिलाओ की मदद करती हूँ“, महिलाएं भी अपनी समस्या लेकर चम्पी बाई के पास आती है। नरेगा भुगतान, पेंषन जैसे काम अब चम्पी बाई करवा स्वय करवा देती है। चम्पी बाई ने हाल ही में अपनी जानकारी को बढाने के लिए स्मार्ट फ़ोन भी खरीद लिया है ।

 

चम्पी बाई कहती है कि, “घूंघट में कुछ नही है और हिम्मत से बड़ा कुछ नही है। हिम्मत से ही आज मैं नई शुरूआत कर पाई हूं।”

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