Category Archives: Listening to Grasshoppers

Parables from the diary of a labour professional…of sub-altern voices, experiences and acts of valor!

विकलांगता नहीं आई आड़े….बन ही गया टेलर-मास्टर

मोहन बना गाँव वालो के लिए एक मिसाल चार माह बाद जब मैं मोहन से मिलने उसके घर गया तो देखा कि उसके घर पर 4-5 लोग कपड़े सिलवाने के लिए तैयार खडे थे और मोहन उन सभी का नाप … Continue reading

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यह कैसी बारिश आई कि सब कुछ बहा ले गई…..

अहमदाबाद में जो लोग रहते हैं,वो इस शहर के मूड को बखूबी जानते होंगें। अगर कहें की यह शहर अचानक ही अपना मूड बदलने में माहिर है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इसके मूडियल होने का पूरा पता रविवार को … Continue reading

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Women Workers at the Forefront!

Daad village in Khudarda panchayat is located around 15 kilometres  from the Aspur block headquarters in Dungarpur district of south Rajasthan. Towards the end of 2012, 45 workers worked under the MNREGS scheme to construct a concrete cement road that … Continue reading

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Happy International Women’s Day!

Woman is the companion of man, gifted with equal mental capacity… If by strength is meant moral power, then woman is immeasurably man’s superior.   These lines by Mahatma Gandhi several decades ago ring true even today. Today on the … Continue reading

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बॉबिन ऑपरेटर “नंदू ”

प्रवास के मायने अलग अलग लोगों के लिए अलग अलग हैं। पर इतना तो जरूर है कि प्रवास चाहे किसी भी कारण से हो-स्वेच्छा से या परिस्थितियों से बाध्य होकर, अपने पीछे पीड़ा और अवसाद का एक बहुत ही भारी … Continue reading

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मेहनत की कमाई, क्षण में डुबाई

खातुराम अहमदाबाद शहर में पिछले पांच वर्षों से मार्बल व टाईल फिटिंग का कार्य करता है। सभी श्रमिकों की भाति दीपावली त्यौहार मनाने के लिए गांव जाने के लिए वह भी उत्सुक था। उसने शहर के सरखेज क्षेत्र की साईट … Continue reading

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खेल-खेल में

पारंपरिक रुप से कठपुतली का खेल बच्चों के मनोरंजन के लिये जाना जाता है पर इस खेल के माध्यम से कुछ गंभीर मुद्दों पर जानकारी प्रदान करने का विचार भले ही सुनने में कुछ अटपटा सा लगे पर हाल ही … Continue reading

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शाईनिंग इंडिया – कचरा ही है आजीविका का सहारा

तड़के 5-6 बजे अपनी पीठ पर बोरा लादे निकल पड़ती हैं आजीविका के लिए। जहां गंदगी या कचरा देखा बस घुस गईं कचरे के ढेर में बिना सोचे कि इससे उनके स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा। कचरे के ढेर में … Continue reading

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वक्त की मार से हारे मजदूर को श्रमिक केन्द्र का सहारा

विक्रमसिंह रामसिंह जाटव यमुना ब्रिज, आगरा का रहने वाला है। विक्रमसिंह की आयु 42 वर्ष है। कई सालों तक विक्रमसिंह ने आगरा के कारखानों में मिस्त्री का काम किया। मोहनलाल जो कि अहमदाबाद में ठेकेदारी करता है ने विक्रमसिंह को … Continue reading

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A letter to Aajeevika team…

श्रमिक साथियों, आप व आपकी टीम को मजदूर दिवस की हार्दिक शुभकामनाए ! आप सोच रहे होगें कि आज मैं आपको ऐसा (श्रमिक) क्यो बोल रहा हूं ? चलो आप सब शायद इससे थोडा कम सहमत हो लेकिन आज के … Continue reading

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